#Kavita by Brij Vyas

— आज लगे अनजाने ” !!

 

तिरछी नज़रें डाल चल दिये , हम तो हुए दीवाने !

मूक निमंत्रण हमें मिला जब , छलके ये पैमाने !!

 

पीछा करती लगे निगाहें , भाग कहाँ जाएंगें !

कानों में गूंजा करते हैं , छेड़े हुए तराने !!

 

हंसी तुम्हारी बड़ी निठल्ली , पीछा ना छोड़े है !

आनन  पर अठखेली करते , भाव सभी मनमाने!!

 

नख़रे नाज अभी कायम हैं , जादू है जलवा है!

हम जैसे तो जाने कितने , भूले ठौर ठिकाने!!

 

मुड़ मुड़ कर ना देखो ऐसे , हम ना रहे हमारे !

जाने पहचाने रिश्ते भी , आज लगे अनजाने !!

 

तुम मुस्काकर चल दोगे फिर , हम तो रहे अकेले !

हाल हमारा किसे बताएं , केवल रब ही जाने !!

 

बड़े लुभावन वादे तेरे , मोहक छवि है न्यारी !

हमें भेंट वादे करना तुम , करना नहीं बहाने !!

बृज व्यास

 

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