#Kavita by Brij Vyas

” सारंगी के सुर लागे हैं “!!

 

अँखियों में फिर आस जगी है ,

हँसकर मनवा करे ठगी है !

आस ले रही आज हिलोरें ,

हलचल जानो खूब मची है !

जागी पीर सुरों से ऐसी ,

सपनों के फेरे लागे हैं !!

 

टूट टूट कर बिखरे हैं हम ,

उम्मीदों पर ठहरे हैं हम !

मौसम की गलबहियों से क्या ,

घाव मिले जो सहते हैं हम !

तेरे आने के सन्देशे ,

खुशियों के भी पर लागे हैं !!

 

तेरा आना महकी कलियां ,

सूनी ना लागे हैं गलियां !

गमक गये हैं सारे अरमां ,

खूब मनेगी अब रंगरलियां !

करवट बदले भाव चितेरे ,

लगते पलपल अब जागे हैं !!

 

बृज व्यास

 

 

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