#Kavita by भुवनेश चौहान चिंतन

राष्ट्र वाद

कविता
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कोई छप्पन इंची सीना  घूमे नये बसेरों में।
काश्मीर में कुत्ते पत्थर मार रहे हैं शेरों में।।
मत ना सोया शेर जगाओ,
नहीं घिनौने काम करो।
आया जब सैलाब बचाये ,
कुछ तो कुत्तों शर्म करो।।
चिंगारी तुम मत ना फेंको बारूदों के ढेरों में।
काश्मीर में कुत्ते पत्थर मार रहे हैं शेरों में।।

अच्छे थे हालात लोग,
घाटी में मौज मनातेथे।

और तुम्हारी रोजी रोटी ,
के साधन बन जाते थे   ।।
कठमुल्लों ने मार कुल्हाड़ी ली खुद अपने पैरों में।
काश्मीर में कुत्ते पत्थर मार रहे हैं शेरों में।।
भारत माँ के हैं सपूत ,
पत्थर से जिन्हें डराते हो।
माल खसम का खाकर के,
तुम गीत यार के गाते हो।।
सेना को गर मिले इशारा भगदड़ मच जाये भेडों में।
काश्मीर में कुत्ते पत्थर मार रहे हैं शेरों में।।
अफजल को फाँसी हो चाहे,
जब कोई बुरहान मरे।
मशरत और गिलानी को

मिर्गी का दौरा अगर पड़े ।।
तब अपनी औकात दिखाने की है होड़ गधेडों में।
काश्मीर में कुत्ते पत्थर मार रहे हैं शेरों मे  ।।

भुवनेश चौहान चिंतन
ब्लॉक कालोनी खैर अलीगढ उ प्र २०२१३८

One thought on “#Kavita by भुवनेश चौहान चिंतन

  • July 20, 2016 at 7:51 am
    Permalink

    sundar avam steek !!!!!!
    uttam

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