#Kavita by संजय अश्क बालाघाटी

अर्शआर

आज तो बस जिस्म
खाक मे मिला है ‘अश्क’

मर तो मै तभी गया था
जब उसकी शादी हुई थी.
…….
अजीब है ना ‘अश्क’
ये ईश्क की बेबसी

ना उसे आंसू दिखते है
ना लोगो को हंसी.
……
दुनिया ने तो मुझे ‘अश्क’
हसते हुये  देखा है

बस वो आईना ही है
जिसने मुझे रोते हुये देखा है.
…..
सूनो यारो
मोहब्बत की अदालत से ये आया है फैसला

वो महफिल मे हंसती रहे
और मै रोता रहुं अकेला.
…….
भूला दुंगा तुझे
ये लिखके दे सकता हुं

पर तुझे याद नही करूंगा
कह नही सकता.
….
तु इतना खूश मुझसे ही है ना खूदा
कि मेरे इतना दर्द
और भी किसी को देता है.

मेरी बरबादी की ‘अश्क’
मुझे वजह समझ ना आई

ये मेरी सच्ची मोहब्बत है
या है उसकी बेवफाई.

संजय अश्क बालाघाटी
पुलपुट्टा तह-खैरलांजी
जिला-बालाघाट
मो-9753633830

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