#Kavita by Acharya Shilak Ram

किसान व मजदूर की सुनो

कैसे मने दीवाली!

इनकी   किस्मत  भारत  में

काली काली काली काली !!

 

गरीब व अभावग्रस्त को सुनो

क्या मतलब दीवाली!

क्या खरीदना- कैसे खरीदना

महीने से पहले जेब हो खाली!!

 

पहले ही जो हो चुके बदहाल

क्या अर्थ है दीवाली!

लक्ष्मी भी कैसे उनके यहां आए

किसान -मजदूर -हाली- पाली!!

 

टोटे ने जहां निवास बनाया  सुनो

वहां न होए दीवाली!

अन्नदाता  जो  सारे  भारत  का

स्वयं उसकी ही खाली है थाली !!

 

ठेके के दिहाडीदार मजदूर  सुनो

कब मना  पाए दीवाली!

हाडतोड   मेहनत  सतत करने ने

उनके शरीरों की जान  निकाली !!

 

लाख लाख जहां पर वेतन मिलता

वे ही मनाते दीवाली!

ठेके पर जिनकी चार हजार की नौकरी

उनके कब चेहरों पर आई है लाली!!

 

बंधुआ मजदुरी जो यहां पर करते

याद न उन्हें दीवाली!

तिल तिल करते सडकर मरते  हैं

भारत में मस्ती मारते बस मवाली!!

 

लक्ष्मी इतनी  बेवकूफ  नहीं सुनो

गरीब की हो दीवाली!

पेट भरने में ही जिंदगी चली जाती

जैसे कीडे बिलबिलाते गट्टर -नाली!!

 

चकाचौंध का गरीबों से क्या संबंध

न मतलब है दीवाली!

बाहर- भीतर से खुश व संपन्न जो

उनकी ही  मनती है यहां  दीवाली!!

 

सत्तर करोड किसान मजदुर सुनो

कभी न मनाते दीवाली!

ठेके व बंधुआ मजदूरी करने वाले

कई सदियों से खाते आए हैं गाली!!

 

बाहर भीतर से इस देश के नागरिक

मना सकें दीवाली!

व्यवस्था में कुछ ऐसा हो परिवर्तन

जो प्रामाणिक हो- नहीं हो जाली!!

 

नवसस्येष्टि यज्ञ सब ही करें संपन्न

गरीब के घर भी हो दीवाली!

सबको तरक्की के पूरे मिलें अवसर

सबके यहां भरपूर मन सके दीवाली!!

 

दीवाली ; होली विकास अभिव्यक्ति

संपन्नता के त्यौहार!

खाने रहने के जिनको पडे हों लाले

उनको जीत की जगह मिलती हार!!

 

       आचार्य शीलक राम

         वैदिक योगशाला

Leave a Reply

Your email address will not be published.