#Kavita by Acharya Shilak Ram

नोटबंदी
नोटबंदी असफल हुई
पौ बारह भ्रष्टाचार!
आधा आधा दोनों का
चालू छल लूट व्यवहार!!
आतंकवाद या गलाकाट
गद्दारी या विश्वासघात!
गरीब; किसान मर रहे
भ्रष्टाचारियों को प्रभात!!
सौ करोड भारत लाईन में
बाकी कर रहे सौदोबाजी!
आधा आधा बांटकर
कर रहे राष्ट्र संग दगाबाजी!!
ईमानदारी बस गरीब हेतु
राष्ट्रलूट की छूट भ्रष्टाचारी!
पूरा भारत बदहाल हुआ
मची हुई चहुंदिशि मारामारी!!
हर रोज योजनाएं बदल रहे
अंधाधूंध ; अदूरदर्शी व्यवहार!
खुद को धन्ना सेठ बनाकर
कर रहे राष्ट्र अस्मिता प्रहार!!
असफलता छिपाने को ड्रामे सब
नित खेल रही है सरकार!
व्यर्थ में पीठ थपथपाने से
न होगा भारत राष्ट्र उद्धार!!
आचार्य शीलक राम
वैदिक योगशाला

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