#Kavita by akash khangar

UNCONDITIONAL
FRIENDSHIP
इंसान हूँ गलती करने का हक़ मुझे भी तो है
कुछ चुभा है तुझे पर कहता नही
तेरी चुभन का अहसास मुझे भी तो है
माफ़ कर दे मुझे या रुख मोड़ ले
तुझे खोने का मलाल मुझे भी तो है
इंसान हूँ…

क्या उठाई कसम क्या इरादा किया
जैसे बात न करने का कोई वादा किया
मैं जानता हूँ यार तन्हा है तू
इस तन्हाई का अहसास मुझे भी तो है
इंसान हूँ….

रिस्तो का पल भर में न जनाज़ा उठे
शीशा-ए-दोस्ती न टुकड़ो में बटे
वक़्त है अब तलक मुड़कर देख तो सही
तेरा इंतज़ार यार अभी भी तो है
इंसान हूँ….

कल मुलाकात होगी
जाने क्या बात होगी
तेरे हाथ जन्नत
खाक मेरे हाथ हो
राख बनकर मिट्टी नसीब तो हो
नाराजगी तुझे मुझसे इसके बाद भी तो है
इंसान हूँ…

तेरी शोहरत और दौलत से वास्ता क्या है मेरा
तू जानता है यार अलग रास्ता है मेरा
पहले जैसा मिले जो लगा ले गले
उस यार की चाह मुझे अब भी तो है
इंसान हूँ…..

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