#Kavita by Alok Trivedi

ग़म के सिवा इस दुनिया में , रखा हुआ है क्या ,

तू जो न हो तो मेरी, कौन करे परवाह .

जहा भी मैं जाऊं , भूलू भटकूँ रह जाऊं  या ना,

मेरी कौन करे परवाह .

याद तेरी जब आए , मन मेरा भर जाए ,

तेरे उपकारों का बोझा, कैसे उतारू माँ .

मेरी कौन करे परवाह ,

जब से दुनिया में आया, साथ रहा तेरा साया.

जब भी भटका राह से अपनी , तूने ही मुझको समझाया ,

मेरा जीवन तुच्छ है माता , तेरा ऋण है अपार .

मेरी कौन करे परवाह .

दुनिया से जब ठोकर खाया , तेरे आँचल में सुख पाया ,

कैसे करू बखान ,

तू जो ना हो तो मेरी, कौन करे परवाह ……

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