#Kavita by Amrendra Anmol

करूण वेदना

 

बादलों की गर्जना

कुरेद रही वेदना

हृदय में दर्द प्रिय

धड़कनों में छन्द ना ।

 

सनन-सनन चले हवा

नयन भरते सिसकियाँ

उपवन भरे सुमन से

अच्छी लगे गंध ना

बादलों की………

कुरेद रही……….

 

आम्रपाली झूमती

कोयल बैठी ऊँघती

मगन भ्रमर मधुरस में

सूनी मेरी अँगना

हृदय में……….

धड़कनों में…….

 

नृत्य करती मोरनी

बसंती मनमोहिनी

पुष्प कमर लचकाती

तुम ही प्रिय संग ना

बादलों की………

कुरेद रही………

       :- अमरेन्द्र “अनमोल”

       Mob. +917870849032

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