#Kavita by Anand Sagar

मेरे ख्वाबों के घर से हर एक रवानी ले जाना,
बिछड़ रहे हो मुझसे तो मेरी ये निशानी ले जाना l
ले जाना सब ख्वाब- खिलौने, ले जाना तुम बचपन मेरा,
और सुनो तुम जाते-जाते मेरी जवानी ले जाना l
कह देना कि पागल था वो जान लुटाता था मुझपर,
मतलब की इस दुनिया में तुम मेरी कहानी ले जाना l
यादों की इक चादर में कुछ बातें मेरी रख लेना,
सब तुमसे मुहब्बत कर लेंगे, थोड़ी नादानी ले जाना l
है हिज़रत की तक़लीफ़ तुम्हें भी लोगों से ये कह देना,
तुम अपनी झूठी आंखों में कुछ झूठा पानी ले जाना l
हर कतरे को “सागर” करना आदत है इन आंखों की,
सुनो मेरी आंखों से तुम ये मौज-ए-उफानी ले जाना ll
हिज़रत=जुदाई
        -Er Anand Sagar Pandey

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