#Kavita by Anil Aboojh

मैं तो रेहड़ी लगाऊंगा

क्या?

पागल हो गया है

ना! इसमें पागल वाली कौनसी बात हुई भला!

आपको पता है?

वो गर्वंमेंट स्कूल किनारे

समोसे की रेहड़ी लगाने वाला बाबा

रोज सुबह 100 समोसे लाता है

दो घंटे में बेच देता है

10 के हिसाब से

और फिर ऐसा ही शाम को

आप ही कह रहे थे एक दिन

क्या कोठी डाली है!

लेकिन मूर्ख वो व्हाईट कॉलर नहीं है

लेबर क्लास है

तुझे एमएससी बीएड इसलिए नहीं करवाया

कि तू लेबर क्लास का काम करे

कौनसी व्हाईट कॉलर की बात कर रहे हो?

वो स्कूल वाला पाँच हजार दे रहा था

बारहवीं तक के

और कॉलेज वाला तो और भी हरामी निकला

साला कहता है बीएससी को पढा दो

चार हजार दे दूंगा

जी तो किया

जूता निकालकर

वहीं उसकी कॉलर व्हाईट से रेड करदूँ

इसे आप व्हाइट कॉलर बोलते हैं?

रेहड़ी वाला किसी का रौब नहीं सहता

और आपके व्हाईट कॉलर वालों से

दस गुना कमाता है

अबे पागल! दुनिया क्या कहेगी?

कहने दो..

मैं दुनियां के चक्कर में

भूखा नहीं मरना चाहता||

“अबूझ”

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