kavita by Ankit kumar

अगर बहन ना होती

अगर बहन ना होती तो
शायद घर मे ना हलचल हो पाता

ना कमरे मे रौनक होती
ना घर सजा हमे मिल पाता

ना मेरे माता-पिता को कोई
नाना-नानी कह पाता

ना मुझको और भाई को
कोई मामा कह के बुलाता

ना मेरी पत्नी को कोई
मामी ही कह पाता

ना मेरी पत्नी की कोई
अच्छी सहेली हो पाती

ना अपने दिल की बात
वो किसी से कह पाती

ना ही जीजाजी आ पाते
ना ही हर्ष उल्लास भर पाता

ना ही मेरी कलाई पर
प्यार राखी का सज पाती

ना ही भैया दूज के अवसर पर
कोई दुआए दे जाती

ना समर वेकेशन के अवसर
पर भाॅजा हमारे घर आते

ना मेरे बच्चों संग मिल के
खूब यहाँ हुड़दंग मचाते

ना घर बगीया सा चहकता
हमको यहाँ मिल पाता

अगर बहन ना होती तो शायद घर मे ना हलचल हो पाता ।

One thought on “kavita by Ankit kumar

  • December 16, 2015 at 5:35 pm
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    superb nice poem

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