#Kavita by Ankit Sharma

भारत  माँ  का  दूध  लजाने , वाले  शीश  गिराने  होंगे।
हर दुश्मन को नत करके अब, माँ के कर्ज चुकाने होंगे।
दहशत  उनकी  ताकत  है  तो, राष्ट्र प्रेम का बल हममें।
हर आतंकी  मनसूबों के,  हमको  कदम  डिगाने  होंगे।
प्रेम  पूर्ण  बोली  से  जिनका,  कोसों  तक ना  नाता है।
धार  तेज करके बाणों की,  दुश्मन  पर  बरसाने  होंगे।
भारत  माँ  के  अश्रु  बिंदु  का, यही मूल्य उत्तम  होगा।
अभिषेक रक्त से करके  फिर, उनके  शीश चढाने होंगे।
भूल  गये  शोणित  पीती  वो,  तलवारों  की  धारों को।
उन  दुष्टों  को  इतिहासों  के, पन्ने  याद  दिलाने  होंगे।
दंभी  द्वेषी  कपटी   लंपट,   मानवता   जो   भूल  गये।
हैं  जो  भार  धरा  का  केवल,  भू  से  हमें उठाने होंगे।

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