kavita by chandan mukherjee

  –     – जीवन रंग

जीवन अन्त नहीं
निरन्तर है
मृत्यु मौन कहाँ
मुक्ति है
समय के हलचल में
हम सब शामिल हैं
आज बसेरा है यहाँ
कल जा बसेंगे
शून्य में
दुःख  पर्वत सा नही
इस जीवन का
लौट आये जाने कब
झोंका इसमें सुख का

जीवन अन्त नहीं
निरन्तर है
मृत्यु मौन कहाँ
मुक्ति है
चलो जैसे भी हो
जीवन का हर रंग
इसे जी लें
थोडा सा मुस्कुराएं इसमें
थोड़े आंसू भी हम पीलें

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