#Kavita by chandrakant tripathi

जन्म से था उसी ने ही पाला तुझे।
तूने उसका ही दिल दुखो से भर दिया।
क्या तुमको आजकल के नौजवानो
दूध जिसका पिया उसको ही बेघर कर दिया।
कल की आयी हुई एक अजनबी के लिए।
तूने खुद को कैसे अलग कर लिया।
जब तेरी थी जरुरत माँ ही सहारा बनी
आयी उसकी जरुरत
तो तूने ये क्या किया।
है यही एक आशा अब दिल में मेरे
करे माँ की सभी मन से
सेवा क्रिया।

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