#Kavita by d p s chauhan

“उड़ी  के हादसे पर ”
दोष न दीजे किसीको ,करिये मंथन खूब
पूर्व सूचना थी हमें ,फिर भी हुई है चूक
फिर भी हुई है चूक ,सुरक्षा हाथ आपके
चौकन्ने रहकर ही पाएं ,पर पाक से
चलो हुआ सो हुआ ,सोचिये अब आगे की ,
सतर्क रहकर चाल करें निष्फल ,पापी की
दिनेश प्रताप सिंह चौहान

“उड़ी  के हादसे पर
कोई दोषी नहीं ,हमारी लापरवाही है कारण
पहले घर को ठीक करें ,जब होगा तब हो लेगा रण
गले मिले जब जब, पापी ने पीठ में है खंज़र भोंका
कितनी कोशिश कर देखीं ,पर प्रतिफल में खाया धोखा
समय आगया ,पहले घर में पलते सांपों को मारें
फिर बाहर के दुश्मन को ,दृढ निश्चय करके संहारें
दिनेश प्रताप सिंह चौहान

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