kavita by Dharambir Dhull

चिंता और चिंतन

चिंता क्या है और चिंतन क्या
दोनों का मन मस्तिष्क से नाता क्या
चिंता सिर दर्द बेदर्द कहलाती
और चिंतन सृजन सरिता सी बहती

चिंता बनती अवसाद की जड
बहु व्याधि,श्वास जाएं उखड
और चिंतन से सद भाव उमडते
संयम सुलह तोष पोष उपजते

चिंता से क्रोध अहं निष्ठुरता जागे
दनुज ,भीरू मन, निर्दयी अभागे
चिंतन से कर्मण्य,विनय उपजती
नूतन शब्द सृजन,जिंदगी संवरती

चिंता से मनुज का हाल बेहाल
नित नए रोग उपजते ले रूप कराल
चिंतन से ह्रदयी स्फूटन मानवता
आगे बढें संस्कृति और सभ्यता

चिंता कुंद जीवन का राग अलापे
परिणति दे  लाल रक्त को छापे
चिंतन से बने प्रकृति सम धारणा
सद दृष्टि सुखद सृष्टि सी उदघोषणा

चिंता से पतित जीवन घर परिवार
दुख क्रंधन से सर्व नर नारी लाचार
चिंतन पथप्रदर्शक बन,हरे जन व्यथा
सुख समृद्धि को ,गढे नव सुगाथा

चिंता से बदहाल, छिने सुख संचार
वेदना पोषित करते उठते मनोविकार
हे जन,चिंतन कदापि ना ​हो निराधार
निरूद्देश्य चिंतन भ्रमित ना हो संसार

520 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.