#Kavita by Dr. Krishan Kant dubey

हे सूर्य!तुम्हे नमन

                    ÷

   हे सूर्य!

तुम्हें नमन

नमन तुम्हारी दृढ़ता को

जो अँधकार के लंबे साम्राज्य को नष्ट करते हुए

रोज-ब-रोज

संपूर्ण धरती को प्रकाशित करते हो.

 

हे सूर्य!

तुम्हें नमन

नमन तुम्हारी प्रतिबद्धता को

जो भय,आंतक मय रात्रि को हर पल चीरते हुए

आगे बढ़ते हो

और

संपूर्ण धरती को भय मुक्त करते हो.

 

हे सूर्य!

तुम्हें नमन

नमन तुम्हारी शाहदत को

जो दिन प्रति दिन जल-जलकर

संपूर्ण सृष्टि को जगमगाते हो.

 

हे सूर्य!

इसलिए

जन-जन तुम्हें करता है नमन/नमस्कार और प्रणाम,

तुम्ने तो आदि काल से विश्व कल्याण के लिए

खूद को आहूत किया है

तुम्हारी ही ऊर्जा से गतिमान हैं कण-कण.

 

हे सूर्य!

तुम प्राण हो

तुम गति हो

तुम मति हो

तुम शक्ति हो.

हे सूर्य!

तुम्हारे प्रत्येक स्वरुप को नमन

नमन तुम्हारी शक्तियों के संचार को.

                  ÷         ÷

                             कवि कृष्ण कांत दुबे

                                     कन्नौज

Leave a Reply

Your email address will not be published.