#Kavita by Dr.sarala Singh

रोटी

           …………

  रोटी  की क्या बात करें,

  रोटी की बात निराली है ।

  इसको मत छोटी समझो,

  इसके लिए ही सारा दौड़ ।

  दो वक्त भी रोटी न पाते ,

  ऐसे भी दुनिया में होते हैं ।

  रोटी की कीमत तो भैया ,

  तुम उन मजदूरो से पूछो ।

  एक-एक रोटी की खातिर,

  जो दिनभर मेहनत करते है ।

  कुछ ऐसे भी होते है साथी ,

  अपनी रोटी ही देखा करते ।

  अपनी रोटी के लिये वही ,

  दूजे की रोटी छीना करते  ।

  रोटी की खातिर दुनिया में,

  इंसान तलक बिक जाते हैं ।

  और तो और माँ बहनों का ,

  सौदा करवा देती है ये रोटी ।

  रोटी की न कुछ  बात करो ,

  बड़ी ही अनोखी है ये रोटी ।

  गोलमोल सी दिखती है पर,

  बहुत ही टेढ़ी है ये रोटी भाई।

  बच्चे अपना बचपन छोड़कर,

  इसके ही पीछे भागा करते ।

  शिक्षा के मन्दिर का रास्ता ,

  छुड़वा देती है बस ये रोटी  ।

  रोटी की क्या बात करें भाई,

  बड़ी निराली है ये छोटी रोटी।।

  

                  डॉ.सरला सिंह ।

                  दिल्ली

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