#Kavita by Gayaprasad Mourya , Rajat’

सजल
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मैं आँगन की सोन चिरैया को नही रूठने दूँगा।
घर द्वारे का तुलसी विरवा नही सूखने दूँगा।
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कितनी भी कमजोर लड़ी हो संबंधों की,
पर मोती की माला को मैं नही टूटने दूँगा।
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कर लो अनगिन जतन बीज बिष बोने के,
पर धरती पर कटुता के अंकुर नही फूटने दूँगा।
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ममता समता और एकता आभूषण माटी के,
ओछी राजनीति के छल छंदों से नही लूटने दूँगा।
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कोख से जनम दिया है सद्पुरुषों को जिसने,
उस जन्मभूमि की अपनी माटी नही कूटने दूँगा।
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काली पट्टी बांध खड़ी है यहाँ न्याय की देवी,
मैं सत्ता की शूली पर सच को नही झूलने दूँगा।
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गयाप्रसाद मौर्य रजत आगरा
संयोजक राष्ट्रीय कवि संगम बृज प्रान्त उ प्र

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