#Kavita by Gopal Kaushal

रंग पंचमी

प्रेम रंगों की बौछार रंग पंचमी

महकाती सद्भाव की फुलवारी ।

कोई बना बजरबट्टू ,बनवारी

तो कोई टेपा,गोपाल,गिरधारी ।।

गेर संग निकले जब फाग यात्रा

हर शहर-गांव लगता इंद्रधनुषी ।

बच्चों की टोली भी लगे निराली

भेदभाव से कोसों दूर किलकारी ।।

भाईचारे का अबीर-गुलाल उड़ाओं

भारत माता की जय बोले नर-नारी ।

छोड़ो दुश्मनी की बातें है जो पुरानी

बेमिसाल बने हम भारतीयों की यारी ।।

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