#Kavita by Harprasad Pushpak

सरस्वती वन्दना

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हे !सरस्वती हे ! शारदे मां

हे! सरस्वती हे! शारदे

श्वेताम्वर कर कमल सुशोभित

हंस वाहिनी वीणा वादनी

मैं तुच्छ मलिन तू ज्ञान दायनी

मां निश्चछल निर्मल हो जीवन मेरा

ऐसा तू वर दे

हे! सरस्वती हे! शारदे  मां

हे ! सरस्वती हे! शारदे

शीश मुकुट गल माल विराजत

चमकत लोचन दमकत मुख मंडल

ज्ञान ज्योति की एक किरण मां

हृदय मेरे भर दे

हे! सरस्वती हे ! शारदे मां

हे सरस्वती हे! शारदे

धूप दीप नैवैध्य हाथ ले

मैं नतमष्तक मां करू वन्दना

अपनी कृपा की एक किरण मां

मुझे अर्पित कर दे

हे! सरस्वती हे! शारदे मां

हे सरस्वती हे ! शारदे

कह पुष्पक उद्धार करो मां

मुझ पर भी उपकार करो न

स्वर भाषा लय ताल मेरे मां

कंठ मध्य भर दे

हे! सरस्वती हे!शारदे मां

हे! सरस्वती हे ! शारदे

हरप्रसाद पुष्पक

रूद्रपुर(ऊ. सिं. नगर)

उत्तराखण्ड

मो.99277-21977

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