#Kavita by Hemant Kumar Keern

लोग कहते हैं कि मैं पर कटा परिंदा हूँ।

आपकी आस लिए आज भी मैं ज़िंदा हूँ।।

बेटे की आस में मिट जाती हूँ कोख में

मैं तो बेटी हूँ जो खुद पर शर्मिंदा हूँ।।

सच की ख़ातिर ही खा रहा ठोकरें दर-दर

और वे कहते हैं कि झूठ का पुलिंदा हूँ।।

परिंदे उड़ ही गये सब तलाश घर करने

मैं ही रह गया क्योंकि बूढ़ा वासिंदा हूँ।।

निकाल पाओगे नहीं मुझे दिल से अपने

मज़े के साथ वहाँ बैठा हुआ निंदा हूँ।।

हेमन्त कुमार ‘कीर्ण ‘

चंदौली उ•प्र•

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