#Kavita by Indra dev Bharti

नए साल ! स्वागत है आओ !

गए  साल   के   मगर  अधूरे,

वादे   झोली  में   धर   लेना ।

तनिक  दया-दृष्टि  कर देना ।।

सुख  की  सौ  सौगातें  देना ।

दुःख की दारुणता हर लेना ।

सपनो   के  आवेदन  ऊपर ,

बस तथास्तु लिख तुम देना ।

दुखीराम  के सिर ऊपर भी ,

सुखीराम की भाँति अपना-

हाथ जरा सा तुम रख देना ।

तनिक दया-दृष्टि कर देना ।।

मंगलू   को   मजदूरी   पूरी ,

चंदरू  को  भरपेट  चबेना ।

अल्लादइ को, पोतबहू की ,

गोदी   में   पड़पोता   देना ।

कहकर के इतवार की छुट्टी,

घर   इतवारी  के  आने   से –

तुम  इंकार  नहीं  कर देना ।

तनिक दया-दृष्टि  कर देना ।।

नई प्रात: का दिनकर दमके ।

नई  रात का हिमकर चमके ।

आँसू वाली आँख के आँगन –

ख़ुशियाँ  रोज लगायें ठुमके ।

मुट्ठी  भर  उम्मीदें   जिनकी ,

उनको झोली भर-भर  देना ।

तनिक  दया-दृष्टि  कर देना ।।

———-इंद्रदेव भारती——-

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