#Kavita by ishq Sharma

तू चल बादल बदल फ़ितरत तेरी

  • परत दर परत धुंध शौहरत तेरी।
  • कहीँ आसमानी,कहीँ काली घटा
  • कहीँ श्वेत,तो कहीँ लाली लटपटा
  • दिखे मुझे कभी चक्र वात तुझमे
  • देवालय कभी तो जज़्बात तुझमे
  • दिखे अनंत विरह की आग मुझे
  • हाथजोड़ दिखे कोई प्रयाग मुझे
  • सुबह कुछ और शाम कुछ और
  • मिला नही तुझको तेरा ही ठौर
  • दिनवा रतिया सदा दौड़ लगाये
  • देख मेरे मित का मन अति भाये
  • भागता देख तुझे धरा घबरा गई
  • सोची भागता क्यू चोरो की नाई
  • आस में बैठी वनस्पति मुरझाई
  • बरस भी जा मोसे क्या रुसवाई
  • होते ही शाम तू जल जाता क्यू?
  • नील श्वेत हल्दी मल जाता क्यू?
  • तुझे निहार मैं स्वप्न देखूँ सुहाने
  • बीतेपल कुछअपने कुछबेगाने
  • ऐ बादल तेरी हर धुंध अलग है
  • तुझे ही छूना सबकी  तलब है
  • परत दर परत धुंध शौहरत तेरी।
  • तू मत बदल बादल फ़ितरत तेरी

°°° इश्क़ शर्मा प्यार से °°°

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