kavita by jai rathiya

–       =- छतीसगढ़

छतीसगढ़ हमर बसेरा ,
ये ल कहीथे धान कटोरा ,
दया धरम के हावे जोईहा ,
मया दुलार  के भरे भंडर ,
नदीया नरवा डबरी तरिया ,
हावे सबो के पयास  बुझइया,
छत्तीसगढ  हमर बसेरा,
रहीथे सब जुजुर्माना मिमिल के,
करथे सबो धरम के आदर,
छत्त्तीसगढीय सबो ले नाता जोरे,
छत्तीसगढीय सबले बढिया कहाथे।।

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