#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

छंद ,-हल्दी घाटी युद्ध

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लाशों से पटी थी धरा ,युद्ध को घटी थी धरा ।

दाड़ी और चोटी वाले शीशों का अंबार था ।।

राज पूत हटें नहीं ,मुग़ल भी डटे वहीँ ।

लगता था उस दिन युद्ध आर पार था ।।

तोपें आग फेंक रही ,धायँ धायँ रैंक रही ।

भीलों के तीरों का वहाँ घातक प्रहार था ।।

कोई इस पार भागे ,कोई उस पार भागे ।

राणा की असि पै मानो  काल ही सवार था ।।

हलधर -9412050969/9897346173

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