#Kavita by Jyoti Mishra

जानते तो तुम सब हो,

बस मानते नहीं. .

पास से गुजरते हो,

पहचानते नहीं . . . !

नहीं है मोहब्बत

तो इंकार क्यों नहीं करते

कह दो एक बार कि तुम,

मुझसे  प्यार नहीं करते …!

नहीं है मुझपे एतबार

कोई बात नहीं ….

अपनी आजमाइशो पे अख्तियार

क्यों नहीं करते ..!

गर बदगुमा हो तो

लौट के न आओ  तुम

पर जो मेहरबा हो तो फिर

आ कर न जाओ तुम ….

जान जाती है , जाने से

क्या तुम जानते नहीं ..

जानते तो तुम सब हो

बस मानते नहीं. . . . !

ज्योति मिश्रा

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