#Kavita by Jyoti Mishra

सपनों की उड़ान

मेरी ऑखो में भी अब

पलने लगे हैं सपने,

कल तक जो बेगाने थे,

कहने लगे हैं

आज वो अपने …

तिनका -तिनका बिखरा था,

वजूद मेरा –

बन गई  एक मुकम्मल किताब

मेरे भी जज्बात,

अब लगे हैं छपने ….

लगाए पहरे  ,

घेर दीं बंदिशों की दीवारें

मेरे चारो तरफ –

सुगंध बन  आया

पवन का एक झोंका,

संग उसके मैं भी लगी महकने …

के पिंजरे में कैद थी,

बेबस बुलबुल ,

लग गए अभिव्यक्ति के पंख

आजाद हो

स्वाभिमान  के गगन में

मैं

उड़कर लगी चहकने ….

उमड़ -घुमड़ कर  अंतस में

बवंडर सा मचाया करते थे

ये निरर्थक, बेजान से शब्द

आ गई है जान,

बन गए सार्थक –

मेरी भी कलम

अब लगी है लिखने ….।।।

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