#Kavita by Jyoti Mishra

फरेब तुम्हारी फितरत है

एतबार मेरा शौक ..

तुम  अपनी फितरत नहीं बदल सकते

और मैं

अपना शौक …

 

     तुम्हें रूलाना आता है,

     मुझे मुस्कुराना भाता है ..

     तुम  ऑसू बांटो

     मैं खुशी दूँगी

    तमाम  ऑसुओ को मैं

    हंसी में डुबो दूँगी ….

 

तुम्हारी हर बाजी जीत है

मुझे हारना मंजूर है ..

तुम्हें मंजिलों की तलाश है

मुझे बस ..चलने का

फितूर है ..

 

      तुम दर्द देते हो ,

    मैं स्याही बन जाती हूं

    तुम खामोशियों से मारते हो

    मैं लफ्जों में

   जिन्दा हो जाती हूं …!!!

 

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