#Kavita By Kirti

हम स्तुति तेरी करते हैं
अब मातु पधारो आंगन में,
भक्ति -भाव सौहार्द ख़ुशी का,
विस्तार करो माँ कण कण में ।।
कर अखण्ड ज्योति प्रज्ज्वलित हम,
आह्वान तेरा माँ करते हैं,
माँ आन विराजो कुटिया में,
करवद्ध निवेदन करते हैं ।।
अरदास सुनो माँ दासी की,
है व्याप रहा अन्याय विकट
ईर्ष्या,तृष्णा,काषय,कलुष,
बढ़ रहे माँ तेरे नेत्र निकट
अब जागो हे जग की जननी
निज कर में अब तलवार गहो,
पापाचारी चहुंदिश है बढ़ते,
यह गर्जन सुन न मौन रहो
अब करो गर्जना चामुण्डे,
नरदानव का संहार करो,
हे न्याय की दाती न्यायार्थ
माँ फिर से तुम अवतार धरो
माँ फिर से तुम अवतार धरो
#कीर्ति

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