kavita by Krishna kant madhur

  •       = मधुर हँसगुल्ला

आम आदमी खड़ा था ,लिये टमाटर लाल।

एक थैली में प्याज था ,एक थैली में दाल।

एक थैली में दाल ,हुआ तत्काल तमाशा।

खास मैन था प्रकट ,हाथ में ले डन्डा सा।

बोला कंगले मधुर ,बहुत बदनाम आदमी।

कहाँ से पाई दाल , जो तू है आम आदमी।

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