#Kavita by Lata Rathore

कागज़ की नाव

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कागज़ की नाव सी हो गई है ज़िन्दगी ,
कभी चलती , ठहरती , कभी बहाव में बहती l
कभी हल्की सी हवाओ से डगमगा जाती ,
कभी हौले सी फूंक इसे आगे बड़ाती l
कभी हरे गुलाबी रंगो से सजती ,
कभी बेरंग व्यर्थ कागज़ से बनती l
मैं इसके पीछे बचपन सी दौड़ू ,
बनी अंजान इसे गलने से रोकूँ l
कागज़ की नाव सी हमारी ज़िंदगानी ,
चन्द लम्हो मैं परिभाषित यह कहानी l

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