kavita by manmeet ‘ kavyameet ‘

ताली

मैंने भी
सबकी तरह
नहीं मिलाया उसके सुर से सुर।
लेकिन
जब किसी ने भी
उसकी प्रस्तुति के बाद
नहीं बजाई ताली
तो
मैंने ही खोले अपने हाथ।
और फिर..
मेरी ताली पर
खूब तालियाँ बजीं।
आज
मैं फीस लेकर
लोगों को ताली बजानी सिखाता हूँ।

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