kavita by Manmohan Barakoti

<<>> बालक झण्डू लाल <<>>

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एक मदरसे में पढता था बेटा झण्डू लाल।

उत्तर देने में चतुर, हो कैसा कठिन सवाल।।

कैसा कठिन सवाल, निरीक्षक एक दिन आये।

विद्यालय में देख उन्हें शिक्षक घबराये।।

अच्छा एक सवाल बताओ बच्चों देखो।

वह है चीज एक पर हैं नाम अनेकों।।

उत्तर लगे खोजने बच्चे, किन्तु समझ न आया।

पर पीछे से बालक झण्डू लाल ने हाथ उठाया।।

सनक गए इतने में शिक्षक उसको डाँट लगाईं।

चुप रहना तू, नहीं तो आज फिर होगी खूब पिटाई।।

पर इतने में डिप्टी ने टीचर को टोका।

शाबास बच्चे तुम्हीं बताओ पुट्ठा ठोका।।

बोला झण्डू लाल अजी वह बाल कहाता।

न कटवाये तो तेजी से जटा बढ़ाता।।

इतना सुनते फिर टीचर ने उसको डाँटा।

अब मत फिर कहना आगे, वर्ना पड़ेगा चाँटा।।

फिर डिप्टी का साहस पाकर बालक बोला।

भाँति भाँति बालों के नामों का भेद भी उसने खोला।।

बोला चीज एक भौं मूँछें पलकें, दाढ़ी बाल हमारे।

चाहे छाती और बाल हों नाम भिन्न हैं न्यारे।।

इसी तरह हर बालों को वह लगा बताने।

एक एक कर उन बालों को लगा गिनाने।।

सर से लेकर नीचे तक सब बाल कहाते।

अलग जगह पर अलग नाम से जाने जाते।।

ज्यौं ढोंढ़ी के नीचे उसने हाथ बढ़ाया।

हेड मास्टर साहब को फिर गुस्सा आया।।

उसके उत्तर को सुन डिप्टी भी घबराये।

ऐसी बातें सुनकर उसकी मन ही मन शर्माये।।

मान गए तुम पूरे मुन्शी, डिप्टी ने फरमाया।

लगाकर ठहाका सभी टीचरों ने, ताली जोर बजाया।।

बहुत गुरु ठहरे तुम बच्चू अभी से जब ये हाल।

पैदाएशी ऐसे बच्चे कहलाते झण्डू लाल।।

रचनाकार :– मनमोहन बाराकोटी “तमाचा लखनवी”

3/2 पी० एण्ड टी० कालोनी, मालवीय नगर, ऐशबाग, लखनऊ।

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