#Kavita by Manoj Charan

बकरामंडी 

टीका बाजार में उछाल आ गया,
आरएस का रिजल्ट आते ही,
बाजार में नया माल आ गया।

दौङने लगी गाङीयां, बजने लगे फोन,
कहां पास हुआ कोई, जानता है कौन ?
बधाईयों का दौर चला,
जैसे बवाल आ गया,
आरएस का रिजल्ट आते ही,
बाजार में नया माल आ गया।

शोर घनघोर है, देखो चारों और है,
रिश्तों की है भरमार, मुलाहिजों का दौर है,
कल तक धरती जो प्यासी थी,
बारिस होते ही जैसे सुकाल आ गया,
आरएस का रिजल्ट आते ही,
बाजार में नया माल आ गया।

भारी भीङ है मंडी में,
सप्लाई लेकिन थोङी है,
ग्राहक बहुत भटक रहे हैं,
पर प्रोडक्शन की तोङी है,
हर एक दुकान पे नया दलाल आ गया,
आरएस का रिजल्ट आते ही,
बाजार में नया माल आ गया।

अब लगेगी बोलीयां, बङी एक एक से,
तमाशा खूब देखेंगे लोग, पैसे फेंक फेंक के,
ग्यारह, इक्कीस, इक्यावन, इक्कहत्तर,
लाख पहुंचेंगे अब करोङ तक,
पांव तो क्या बिक जायेगी सोङ तक,
बेटीयों के बाप पर सवाल छा गया,
आरएस का रिजल्ट आते ही,
बाजार में नया माल आ गया।

घुङदौङ लगी है भारी,
सबने अपनी जीन संवारी,
बिना लगामी घोङे पे देखो,
लगे गांठने सभी सवारी,
बकरईद पे जैसे बकरों का,
कोई अकाल आ गया,
आरएस का रिजल्ट आते ही,
बाजार में नया माल आ गया।

लूटेरों की फौज खङी है,
लूट मचेगी अब भारी,
खुद ही जाकर लुटने को देखो,
कर ली लोगों ने तैयारी,
तो सभ्य समाज में जैसे कोई,
मुखौटा पहने डाकू अंगुलीमाल आ गया,
आरएस का रिजल्ट आते ही,
बाजार में नया माल आ गया।

क्या है दोष सिर्फ इन्हीं का,
या हम भी भागदार हैं,
लङके वाले तो छुरी पलारे लेकिन,
क्यूं हम कटने को तैयार हैं,
कर दो इन का बहिष्कार जो,
बेटे का मोल लगाते हैं,
पर अपराधी वो भी होते हैं,
जो अपराध सहते जाते हैं,
तो अपराधों के विरूद्ध बिगुल बजाना है,
बेटी के लिए जंवाई ढ़ूंढ़ो,
बकरामंडी से बकरा खरीद नहीं लाना है।।

मनोज चारण (गाडण) कुमारकृत

मो. 9414582964

रतनगढ़

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