#Kavita by Neeraj Dwivedi

राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति

अभी अभी राष्ट्र वाद मिला था
मैंने परिचय पूंछा तो बोला

मै नेताओं का भाषण हूँ
मैं पी एम का अभिभाषण हूँ
मैं संसद का सिर्फ विचार हूँ
मैं देश का बेरोजगार हूँ
मैं नेताओं का वादा हूँ
मैं भृष्टों का इरादा हूँ
मैं पहले भी एक जुमला था
मै आज भी एक जुमला हूँ

पहचाना नही , मैं राष्ट्र वाद हूँ

मैने जवाब दिया :

तुम हिंदुस्तान की ताकत हो
देश द्रोहियों के लिए आफत हो
तुम गरीब का चारण हो
तुम संसद का उच्चारण हो
तुम माताओं का प्यार हो
तुम शास्त्रों का सार हो
तुम देशभक्तों का समर्पण हो
और राक्षसों के लिए कृपाण हो
तुम भगत सिंह की आग हो
तुम गांधी का त्याग हो
तुम कलाम का मान हो
तुम पटेल का स्वाभिमान हो
तुम विवेकानन्द का ज्ञान हो
तुम शांति की पहचान हो
तुम अब्दुल हमीद का जोश हो
तुम अन्याय के खिलाफ रोष हो

खुद को पहचानो तुम राष्ट्र वाद हो

राष्ट्रवाद पुनः :
फिर ओ लोग क्यों कहते हैं कि
तुम विशेष रंग का झंडा हो
तुम हिन्दू मुस्लिम दंगा हो
तिरंगे से पहचान नही
बस देश में नाच नंगा हो
तुम देश का प्रतिकार बनों
नेताओं का सत्कार बनो
संसद की मर्यादा तोड़ो
तुम शोषण बलात्कार बनो
जातिवाद फैलाओ तुम
और देश में नक्सलवाद बनो
तुम ऐसा राष्ट्र वाद बनो

मै निःशब्द हूँ

#नीरज_द्विवेदी

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