kavita by nisha mathur

फलक से तो³ कर सितारों को, जंमी पर लाना है।
सफर अभी लम्बा है दोस्तों, क्षितिज के पार जाना है।
कामयाबी किसे कहते हैं, और कमाई होती है क्या?
मन मेरा तो आशीर्वाद की गंगा से नहाया है।
चुन-चुन के स्नेह मोती मैने अपने दामन में भरे
भरी भीड़ मैं कंहा अकेली, मेरे अपनो का साया है।
सफर अभी लम्बा है दोस्तों, क्षितिज के पार जाना है।

हम आये खाली हाथ हैं, और खाली हाथ है जाना,
साथ मेरे तो युगों- युगों तक, रिश्तो का सरमाया है।
कितनी दौलत है आगन में मेरे, कितना प्यार समाया,
नेह आशीष दुआ प्रशंसा सबने साथ निभाया है।
सफर अभी लम्बा है दोस्तों, क्षितिज के पार जाना है।

मन में  एक टीस है बाकी, ऐसा कुछ कर जाने की,
हस्ती को मिटा कर अपनी, अपना नाम कर जाना है।
अविरल चलते ही रहना, थकन, विश्राम फिर,क्यूं कर है
उड़ते पाखी से जीवन में, बहुत कुछ कर जाना है।
फलक से तो³ कर सितारों को, जंमी पर लाना है।
सफर अभी लम्बा है दोस्तों, क्षितिज के पार जाना है।

3 thoughts on “kavita by nisha mathur

  • December 15, 2015 at 5:37 am
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    हस्ती को मिटा कर अपनी, अपना नाम कर जाना है।
    अविरल चलते ही रहना, थकन, विश्राम फिर,क्यूं कर है।

    निस्संदेह नाम उसी का होता है जीने अपनी हस्ती को भूल कर, मिटा कर कुछ काम किया हो।

  • December 15, 2015 at 5:57 am
    Permalink

    chun chun ke sneh ke moti apne daaman me bhre
    jeevan me anmol skaratmkta ka bhav
    bhead khoob

  • December 17, 2015 at 3:52 pm
    Permalink

    रूहानी अल्फ़ाज़ों को आपने एक माला की तरह पिरोया है।
    बेहद उम्दा सृजन हेतु बधाई।

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