#Kavita by Nisha Mathur

बातों के सिलसिले

पूछा था नाम तुम्हारा, तुम तो पल में बदल गये,
आहिस्ता आहिस्ता बातों के सिलसिले शुरू हो गये।

पहले तो थी तेरी बातें , खैर खबर और ख्यालों की,
मौसमों के मिजाज और कुछ, अनसुलझे सवालों की,
एक परिचय जो पूछा तो, तुम्हारे इरादे ही बदल गये,
क्यूं रोजाना की बातों के यूं , सिलसिले शुरू हो गये।

कहते हो दिल की अनकही, या सुख दुख की स्मृतियां,
सूने से अंतस के भाव अभाव,वो बोलती सी तितलियां
दिल की बैचेनी को अब,  खुद के लफजों से छल गये,
मन के घोङो संग बातों के,  यूं सिलसिले शुरू हो गये।

कुछ हंसती सी बातें, व्यंग्य, ये अपने आप से गुमषुदगी,
तुम्हारी गहराई में डूबी बातें ना?  मुझको है छलने लगी
अब बिन मौसम बरसात के तुम तो पल पल बरसते गये।
बेकरारी में चुप चुप सी बातों के, सिलसिले शुरू हो गये।

क्यूं मेरे ख्याल, ये बातें अब तुम्हारे साथ साथ चलती है,
जीवन की अधूरी ख्वाहिशे हमारी दुआओं से फलती हैं
खामोशियो में भी क्यूं  तेरे,  बखौफ फलसफे बदल गये,
बातों बातों में मुझे चुराकर , तेरे सिलसिले शुरू हो गये।

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