#Kavita by Ompal Sharma

***((मनहरण छ्न्द))****

देश गर्त जाये नही , लाखों ही  प्रयत्न करो |

हिन्द नोजवान खाया , कसम जो माँकी है ||

कभी कभी बिक जाती,नभ् जल थल माना |

गैरत तो आज भी ये , रखती  ये खाकी है ||

नोजवान  देश हित , विष  पान  जानता  है |

पिला चाहे जितना भी , ऐं गद्दार साकी  है ||

मुश्किल है  राह  पर , भारती  पुकारती  है |

हमको अभी भी देश , भक्त होना बाकी है  ||

****ओमपाल शर्मा****

🙏🌹🇮🇳जयहिन्द्🇮🇳🌹🙏

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