#Kavita by Onkarnath s.Tiwari

(( देख लेना ))

प्यार की नगरी में क़दम ज़रा बढ़ाकर देख लेना ,
अपना होश किसी पर तुम भी गँवाकर देख लेना !

बाँहों में उनके समाकर कभी देख लेना ,
होंठों से होंठ ज़रा सटाकर देख लेना !

कैसे बहकते हैं क़दम किसी के ,
तपते फूलों के पंखुड़ियों को ज़रा सहेलाकर देख लेना !

देखना चाहो हुस्न अगर तो ,
कभी उनके अधरों को छूकर देख लेना !

होश अगर खोना चाहो तो ,
उनके आँखो में आँखे डालकर देख लेना !

लेना चाहो मज़ा प्यार का तो ,
बस कलियों को ज़रा छेड़ कर देख लेना !

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