#Pratiyogita Kavita by pankaj sharma, Jhalawar

ये बारिश बहुत काम आती थी…
दोस्तों को आजमाने मे…
और बिना छाता लिये घर से
निकल जाते थे हम..सोचते थे

कोई तो होगा जो हम पर
आसमान के नीचे आसमां रख देगा…
सचमुच सच्चे दोस्त होते थे…

ये बारिश बहुत काम आती थी..जब खुद के लिये नहीं.. किसी और के लिए
छाता ले जाते थे… सोचते थे..सच्चे साथी युँ ही नहीं मिलते…

और..आज भी ये बारिश बहुत काम आती है…
भीगी पलकों को साथ लेकर चलने मे..
और कोई जान भी नहीं पाता है.. कि
मैं भीगा हुँ या भीगी हैं आँखें..
रिश्तों के,दोस्तों के,जमाने के पल मे
बदलने से…
पंकज शर्मा

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