#Kavita by Prakash Chandra Baranwal

गीत – प्रीत की लड़ियों में, शब्द – सुमन शृंगार सजा कर

विमल भाव की स्वर लहरी में, अरमानों के दीप जलाकर

 

घूम रहे हैं डगर – डगर, अलख जगाने आये घर – घर

स्वागत है श्रीमन्त आपका, आप हमारे रत्न सुधाकर

 

यह समाज है मन का दर्पण, करें स्वतः विचार और मंथन

इसके हर गुण – अवगुण में, झलकेगा अपना मुख – दर्पण

 

जिस समाज ने जन्म  दिया, परिचय  जग पहचान  दिया

स्वतः करें विचार औचिंतन, उस हित क्या उत्सर्ग किया

 

आओ मिल सद्भाव जगायें, अपनों को हम गले लगायें

दूर नहीं हम पास तुम्हारेसंकल्प यही मन में दोहरायें

 

यह यौवन है चंद प्रहर का, पास बैठ पल भर मुस्काएँ

एकबद्ध हम साथ – साथ हैं, मंत्र यही घर – घर फैलाएँ

 

प्रकाश चन्द्र बरनवाल, आसनसोल

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