#Kavita by Prerna

-‘बाबुल’

 

धीरे बोलो गुस्सा मत करो,

मुस्कराते रहो ये सब तुम सिखा गये।

 

विद्या का ज्ञान संस्कारो का पाठ,

सिखाकर डोली में विदा कर गये।

 

बाबुल तुम छोड़कर कहा चले गये।।

 

त्याग ,ममता,स्वाभिमान

से जीना सिखा गये,

 

आत्म ग्लानि से परे सर उठाकर,

जब हम जीना सिख गये,

 

बाबुल तुम फिर भी छोड़कर चले गये।।

 

आपकी आत्मा की शांति,

पारिवारिक ऊँच नीच को भूल,

 

हँसकर हर घूंट पीना सिख गये,

फिर भी दिल भर आता,

 

बाबुल तुम हमेशा के लिये छोड़कर चले गये।।

 

 

Mangesh Jaiswal

 

पापा शिक्षक अनमोल हमारे…

प्यारे पापा, न्यारे पापा,

तुम शिक्षक अनमोल हमारे।

नन्हे नन्हे कदमो को तुम चलना सिखलाते हो,

सुनी -सुनी आँखों में तुम नए ख्याब जगाते हो,

प्यारे पापा, न्यारे पापा,

तुम शिक्षक अनमोल हमारे।

गिरकर उठना,उठकर चलना

तुम सिखलाते हो,

खेल-खेल में पापा मेरे ,

कैसे पाठ पढ़ाते हो?

प्यारे पापा, न्यारे पापा,

तुम शिक्षक अनमोल हमारे।

संरक्षित कर हमेशा सदा,

खुद तकलीफ़ उठाते हो,

दुःख-सुख में कैसे जीना है?

यह तुम सिखलाते हो,

प्यारे पापा, न्यारे पापा,

तुम शिक्षक अनमोल हमारे ।

स्वाभिमान से जीना तुमने सिखाया,

गीता को तुम बहुत याद आते हो।

प्यारे पापा, न्यारे पापा,

तुम शिक्षक अनमोल हमारे।

111 Total Views 3 Views Today
Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *