#Kavita by Prerna

“पहेली”

 

जिंदगी की हकीकत कैसी एक पहेली है ,

साथ सब हो फिर भी कुछ अधूरी है।

 

कोई जो किसी के खातिर सब छोड़ आता है,

दूसरा सब होते हुए कुछ और पा जाता है ।

 

सिर्फ एक विश्वास का अहसास उन्हें जोड़ता है,

साथ -साथ चलकर बहुत दूर को  मोड़ता है ।

 

एक अथाह प्यार की डोर साथ होती है,

जो कभी -कभी बहुत छोटी महसूस होती है।

 

मन सिर्फ उनके प्यार का मोहताज होता है ,

सब कुछ होकर भी इसके बिना कुछ न होता है।

 

क्यों आदमी इस प्यार को समझ नही पाता,

बाद में सिर्फ हाथ मलकर रह जाता ।

 

माँ -बाप के  प्यार को छोड़ हम उनसे बंधते है,

पर कभी -कभी थोड़े प्यार को तरसते है।

 

यही जिंदगी की अजीव पहली है।

 

जो समझ गया वो जी गया ,

जो न समझे तो जीवन व्यर्थ है ।

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