kavita by radha mahendra shrotriya

————ज्ञान की जननी———–

तुम हो ज्ञान की जननी

माता

मेरे अंतस को उज्जवल

कर दो

दूर भगाकर अंधकार

को

प्रेम भाव ह्रदय मैं भर

दो

कोई छोटा न कोई बड़ा

रहे

हर जन मैं सम भाव

रहै

कृपा करो है ज्ञान की

जननी

मेरे अंतस को निर्मल

कर दो

दूर हों विकार सारे

मन

​ छल कपट रहित

कर दो

दुनियाँ के हर इसाँन मैं

माँ

मुझको तुम्हारा ही दर्शन

हो

स्वार्थ से अपने ऊपर

उठकर

​ अनुभव औरों की पीड़ा

हो

कुछ नाम मैं कर पाऊँ जग

​ मैं

माँ तुम ऐसी बुद्धी का वर

​ दो

अपने ज्ञान का  आशीष​

देकर

मेरा ये जीवन धन्य कर

दो

तुम हो ज्ञान की जननी

माता

मेरे अंतस को उज्जवल

कर दो .

232 Total Views 3 Views Today
Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *