kavita by Rahul Shivay

एक गगन के हैं हम तारे, एक वृक्ष के फल हम सारे,
हम अपने मतभेद मिटाकर अंधियारे को दूर भगायें |
आओ मिलकर दीप जलायें ||

तेरे सुख में मेरा सुख हो, मेरे सुख में तेरा सुख हो,
यही समय की मांग है बन्धु एक दूजे का साथ निभायें |
आओ मिलकर दीप जलायें ||

है संबंधों में जो दूरी, यही हमारी है कमजोरी,
भेदभाव को आज मिटाकर एक प्रबल गठरी बन जायें |
आओ मिलकर दीप जलायें ||

आपस के हम वैर भुलाकर, एक दूजे का साथ निभाकर,
अपने देश के हित की खातिर आज कदम से कदम मिलायें |
आओ मिलकर दीप जलायें ||

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