#Kavita by Rajendra Bahuguna

जहर का कहर

ये राजनीति  विषपान सियासी  लंच  दिखायी देता है

देश का दुश्मन तुमको  क्यों सरपंच  दिखायी देता है

धरती  और  आकाश  विरोधी ,मंच  दिखायी देता है

क्यों  दूर-दृष्टि  आभाव  सदा, प्रपंच  दिखायी देता हेै

 

जिसको तुम दूध पिलाते हो ये  सर्प विषैला जाहिर हेै

हरकत  पहले  भी देख चुके, ये डसने मे ही माहिर हेै

जानबूझ  कर  सत्ता  के  लालच में, सांप को पालोगे

मुझे  बताओ  भारत  को  अब  कितना नीचे डालोगे

 

सात दशक से  अपना  हम इनको भी बना नही पाये

हमने सब  कुछ लुटा दिया,गुणगान पाक के ही गाये

अलगाव-वाद  के  घाव यहा आभाव भाव से बोल रहे

स्वाभिमान  क्यों भारत का अब  चौराहो में तोल रहे

 

कब होगा वो  निर्णय अब ,इनको सबक सिखाने का

क्या  मतलब है सापों  के  आगे अब बीन बजाने का

कब तक खून पिलाओगे, नर-भक्षी  को समझौते से

कब तक इज्जत खोओगे इस राजनीति के न्यौते से

 

राष्ट्र-भक्ति  के  सपनो  को क्यों  डाल रहे हो पानी में

भारत का खून जूनूनी क्यों ठण्डा है आज जवानी में

कंहा रूकी हुयी हैे जलधारा,जो बहती सदा रवानी में

इतिहास उठाओ देखोतो,भारत  अस्तित्व कहानी मे

 

अब पानी  सिर से उपर हैेे,हरकत  बर्दाश्त नही होगी

छोटी-मोटी  सिरकत  से,कुछ हानि खास नही होगी

हमने  तो  प्यार उडेला है जो इनको रास नही आता

ये स्वाभिमान है शेरों  का,जो भूखा  घास नही खाता

 

इज्जत जिनको देते हो,ये उस इज्जत के योग्य नही

जिन भोगों  से  पाल रहे,ये उन  भोगों के भोग्य नही

नासूर  पनपता  हो तन  में  उसका उपचार जरूरी है

शल्य चिकित्सा शीघ्र  करो,ये भारत  की मजबूरी है

 

मेरा घर रास नही आता तो  पाकिस्तान  चले जाओ

जिन्दा हैे ईमान  अगर ,भारत की   रोटी मत खाओ

टुकडो में पलने वालो से कुछ  आविष्कार  नही होता

ये कवि  आग की  भांषा  हैे,मुर्दो में प्यार  नही होता।।

                 राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)

                      मो0 9897399815

         rajendrakikalam.blogspot.com

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