#Kavita by Rajendra bahuguna

जलीलों की दलीले

सियासत  ने  हमारी  कौम  को मुर्दा बना डाला

गले मिलकर कमीने  से  बुना  कैसा है ये जाला

कब  तक  दोस्ती  करके  घर  अपना बिगाडोगे

सियासत में सियासत से  अब  कितना दहाडोगे

जेलों मे  पनाह  मिलती  है हर  आतंकवादी को

मुजरिम के लिबासों में  तडफती, देख खादी को

यहाॅं फाॅंसी भी रूकती है  हूकूमत  की अपीलों से

लफंगे  बच  निकलते  है  यहाॅं  महगे वकीलों से

यहां तो एक ही रोना है  बश, बातें  ही  चलती हेै

हूकूमत जब बदलती है,तो ये हरकत मचलती है

कुचलते  हैं  सभी  आर्दश   हमारे   कारनामो से

यहाॅं  आतंक   झडते   हैं , नेता   के   पजामो से

हूकूमत   का  भरोशा  छोड़  कर  तैयार  होना है

तिरंगे को,सियासत की फिजां से अब ना ढोना है

उठाओ अस्त्र  अपने  अब ,बस, घुसते चले जाओ

वतन का एक  फतवा हेै,बस ,तुम आग बनजाओ

सपोलों  के  कपोलों   मे   कितना   दूध  डालोगे

इन  आतंक  की  नश्लों  को  कितना और पालोगे

उठाओ अस्त्र अपने अब जहाॅ   आतंक  दिखता है

नेता को कुचल डालो जो इनका भाग्य लिखता है

मेमन की  सिफारिस  में भी नैतिकता दिखाते हो

भारत  में  अमन  आतंक  से  होगा , ये  गाते हो

अभी  पंजाब  देखा  हेै, अब  हिन्दुस्तान बाकी है

मिलाया  हाथ  दुश्मन  से, ये  तो  एक  झांकी है

जरा पूछो  इस नाईक  से  दरिन्दे  कारनामो को

ये हरकत कौन करता  है, पूछो  इन  पजामो को

गुनाहों  से  उजडते  हैं, क्यों  घर  बे – गुनाहों के

क्या  कीमत   लगाओगे , उन  बे – दर्द आहों के

तुम नवाज  के  घर  में  बधायी  दे  कर आये थे

सुषमा  ने  भी  सावन  के  सुरीले  गीत  गाये थे

अब हाफीज कुत्ते  की  तरह  रोता  है  सरहद में

ये  मुर्दे  रोज  रोते   हैं   दहशत  गर्द  के  मद में

अहिंसा छोड़ कर,ताण्डव करो कैलाश बन जाओ

गाॅधी  का  करो  आदर , पर  सूभाष  को  गाओ

यहाॅ  संहार   करने  को  खुद  अवतार  आता है

ये  हिसा  भी  अहिसा  है  ये मुरलीधर बताता है।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)

मो09897399815

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