#Pratiyogita Kavita by Rashmi Abhya

आँसू का सैलाब

गम की घाटियों में

अनवरत बहता रहा….

अतीत की बिखरी यादें,

पीर बन सिसकती रही

सीने में….

झुलसा डाला मन तरु को

कुछ इस तरह पतझड़ ने….

फिर न निकल पाई

हरी कोपलें

सावन के महीने में…!!

‘रश्मि अभय’

पत्रकार

पटना (बिहार)

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